देहरादून, 02 अगस्त 2025 (शनिवार): देहरादून जनपद में कार्यरत आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉ० डी० सी० पसबोला ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अपने नाम की है। उन्होंने AISECT Learn, भोपाल (मध्य प्रदेश) से प्रशिक्षण प्राप्त कर सर्टीफाइड POSH स्पेशलिस्ट एंड ट्रेनर (POSHST) की उपाधि प्राप्त की है। प्रशिक्षण पूर्ण होने पर उन्हें “POSH Awareness at the Workplace” का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया।
nnnnडॉ० पसबोला ने बताया कि POSH अधिनियम, जिसे “यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013” के रूप में जाना जाता है, महिलाओं को कार्यस्थल पर सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण प्रदान करने हेतु बनाया गया एक महत्वपूर्ण कानून है।
nnnnPOSH अधिनियम (2013) की मुख्य बातें:
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- लक्ष्य: कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की रोकथाम और समाधान। nnnn
- प्रभाव क्षेत्र: यह अधिनियम निजी, सरकारी, औद्योगिक, शैक्षणिक, रक्षा, खेल संस्थानों तथा घरेलू कामगारों तक सभी पर लागू होता है। nnnn
- यौन उत्पीड़न की परिभाषा: इसमें किसी भी प्रकार का अवांछित शारीरिक, मौखिक या सांकेतिक व्यवहार शामिल है, जैसे अश्लील टिप्पणियाँ, अश्लील सामग्री दिखाना, स्पर्श या अनुचित प्रस्ताव। nnnn
- आंतरिक शिकायत समिति (ICC): 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में ऐसी समिति का गठन अनिवार्य है। nnnn
- शिकायत प्रक्रिया: किसी भी महिला द्वारा ICC में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिसके पश्चात समिति निष्पक्ष जांच कर कार्यवाही करती है। nnnn
- विशाखा दिशानिर्देश: POSH अधिनियम सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1997 में जारी विशाखा दिशानिर्देशों पर आधारित है। n
डॉ० पसबोला ने यह भी साझा किया कि इस अधिनियम की जानकारी और पालन संस्थानों के लिए न केवल कानूनी रूप से आवश्यक है, बल्कि यह एक समावेशी और सुरक्षित कार्य-संस्कृति की दिशा में भी महत्त्वपूर्ण कदम है।
nnnnडॉ० डी० सी० पसबोला का प्रोफ़ाइल:
nnnnडॉ० पसबोला वर्तमान में जिला देहरादून, उत्तराखंड में आयुष चिकित्सा अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें Symbiosis Institute, पुणे से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मेडिकोलीगल सिस्टम (PHDMLS) की उपाधि प्राप्त है। वे विभिन्न मेडिको-लीगल विषयों में प्रशिक्षित हैं और स्वास्थ्य एवं कानून के क्षेत्र में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
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