36वीं पुण्य तिथि पर याद किए गए एच एन बहुगुणा

Uttarakhand News
n

(देहरादून)17मार्च,2025.

nnnn

देश के महान नेता भारत के पूर्व वित्तमंत्री व उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे हिमालय पुत्र स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा का व्यक्तित्व महात्मा गांधी व नेता सुभाष चंद्र बोस के व्यक्तित्वों का मिश्रण था यह बात आज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सदस्य व उत्तराखण्ड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा की ३६ वीं पुण्य तिथि के अवसर पर घंटाघर स्थित उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण के पश्चात स्वर्गीय बहुगुणा को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे उनके अनुयायियों को संबोधित करते हुए कही।

nnnn

उन्होंने कहा कि एक सुदूर पहाड़ी जिले के गांव में जन्म लेने वाले मध्यमवर्गीय परिवार के बालक ने अपनी प्राथमिक शिक्षा पौड़ी के कुर्सी ब्लॉक में पूरी कर माध्यमिक शिक्षा के लिए देहरादून का रुख किया और फिर चालीस के दशक में स्वतंत्रता के आंदोलन के गढ़ बन चुके इलाहाबाद उच्च शिक्षा के लिए पहुंच गए और इलाहाबाद विश्विद्यालय में जब प्रवेश लिया तो छात्र राजनीति में सक्रिय हो कर एक प्रकार छात्र नेता के रूप में उभरे और वहीं कांग्रेस के दिग्गज नेताओं के संपर्क में आ कर स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हुए तो अंग्रेजों की नजर में चढ़ गए और अपनी सक्रियता व क्रांतिकारी छवि के कारण दस हजार के इनामी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बन गए कई बार जेल गए और भारत की स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस की मुख्यधारा की राजनीति में आ कर एक श्रमिक नेता के रूप में उभरे और पंडित जवाहर लाल नेहरू और लाल बहादुर शास्त्री के संपर्क में आए और देश के पहले आम चुनाव में ही उत्तरप्रदेश की विधानसभा के सदस्य बने और फिर संसदीय सचिव से लेकर उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के संचार, पेट्रोलियम व वित्त मंत्री तक के पदों को सुशोभित किया।

nnnn

धस्माना ने कहा कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री रहते हुए उनके इंदिरा गांधी से मतभेद हुए जिसके कारण उन्होंने कांग्रेस से त्यागपत्र दिया और बाबू जगजीवन राम के साथ मिल कर अपनी अलग पार्टी कांग्रेस फॉर डेमोक्रेसी बनाई जिसका बाद में जनता पार्टी में विलय हुआ । फिर जनता पार्टी में बिखराव हुआ तो बहुगुणा वापस कांग्रेस में आए किंतु ज्यादा दिन वहां नहीं रह पाए और फिर एक अलग पार्टी लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी और फिर उसका लोकदल में विलय एक लंबा संघर्ष का इतिहास बहुगुणा जी ने लिखा।

nnnn

अपने अंतिम समय में वे बहुत व्यथित रहे क्योंकि उनके अधिकांश सहयोगी उनको छोड़ कर तब वीपी सिंह के साथ नव गठित जनता दल में चले गए किंतु उन्होंने कभी हार नहीं मानी और १७ मार्च १९८९ उनकी मृत्यु हुई तो उससे एक माह पूर्व फरवरी में उन्होंने लखनऊ में एक विशाल रैली आयोजित कर अपनी ताकत पूरे देश को दिखाई। धस्माना ने कहा कि एच एन बहुगुणा ने कभी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और हमेशा सत्ता से ज्यादा तरजीह अपने सिद्धांतों को दी और इसीलिए दोनों बार जब उन्होंने कांग्रेस छोड़ी तब कांग्रेस सत्ता में थी और सत्ता को ठोकर मार कर बहुगुणा ने संघर्ष का रास्ता चुना।

nnnn

धस्माना ने कहा कि बहुगुणा जी हमेशा देश में गरीब श्रमिक अल्पसंख्यकों की आवाज को निडर हो कर उठाते थे और पूरे जीवन महात्मा गांधी के पूर्ण स्वराज के नारे के अनुरूप देश की जनता की सामाजिक आर्थिक उन्नति के लिए काम करते रहे इसीलिए अगर उनके व्यक्तित्व के बारे में विश्लेषण करने पर महात्मा गांधी के सर्व जन हिताय की सोच व नेता सुभाष चंद्र बोस के संघर्षों की झलक उनके व्यक्तित्व में दिखाई पड़ती है। धस्माना ने कहा कि अगर हम आज उनको सच्ची श्रद्धांजलि देना चाहते हैं तो उनके बताए रस्ते पर चल कर ही उनको श्रद्धा सुमन अर्पित कर सकते हैं।

nnnn

कार्यक्रम की अध्यक्षता कमर सिद्दीकी व संचालन प्रमोद गुप्ता ने किया। इस अवसर पर नगर निगम पार्षद संगीता गुप्ता, पार्षद अभिषेक तिवारी, सोम प्रकाश चौहान, आनंद सिंह पुंडीर, दिनेश कौशल, एस पी बहुगुणा, शाहिद ,सरदार जसविंदर सिंह मो, ट्विंकल अरोड़ा, घनश्याम वर्मा, आदर्श सूद, प्रेम सागर, विवेक घिल्डियाल, अनुराग गुप्ता, कृष्णा बहुगुणा अजय उनियाल राजकुमार चौरसिया आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे

n

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *