(नई दिल्ली)25दिसंबर,2025.
nnnnजर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) ने भारतीय नौसेना के P75(I) पनडुब्बी डील पर बड़ी जानकारी दी है। TKMS ने कॉन्ट्रैक्ट साइन होने से लेकर पहली प्रोजेक्ट 75(I) पनडुब्बी की डिलीवरी तक सात साल की टाइमलाइन बताई है। TKMS इंडिया के CEO खलील रहमान के अनुसार, भारतीय नौसेना के लिए सभी छह एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन अगले दशक में सर्विस में आने की उम्मीद है। प्रोजेक्ट 75(I) भारतीय नौसेना के लिए बनाई जाने वाली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की खरीद से संबंधित है। इस डील से भारतीय नौसेना की ताकत में जबरदस्त इजाफा होने की उम्मीद है।
nnnnएक दशक में छह पनडुब्बियों की डिलीवरी:
nnnnडिफेंस कैपिटल के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में, रहमान ने कहा कि अगर लंबे समय से पेंडिंग P75(I) कॉन्ट्रैक्ट उम्मीद के मुताबिक फाइनल हो जाता है और टेक्निकल ज़रूरतें जल्दी तय हो जाती हैं, तो इस टाइमलाइन पर पनडुब्बियों की डिलीवरी की जा सकती है। उन्होंने कहा कि बाकी पनडुब्बियों की लगातार तय समय पर डिलीवरी की जाएगी। ये पनडुब्बियां भारतीय नौसेना की जरूरतों के हिसाब से बदले गए एक आजमाए हुए जर्मन डिजाइन और प्रोजेक्ट 75 (स्कॉर्पीन) से मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) के अनुभव पर आधारित होंगी।
nnnnप्रोजेक्ट 75(I) क्या है:
nnnnप्रोजेक्ट 75(I) भारत के सबसे महंगे डिफेंस एक्विजिशन प्रोग्राम में से एक है। इसका मकसद भारतीय नौसेना के लिए छह नेक्स्ट जेनरेशन की कन्वेंशनल सबमरीन बनाना है, जो एडवांस्ड एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP), आधुनिक सेंसर और हथियारों से लैस होंगी। इसके साथ ही इन पनडुब्बियों का डीप टेक्नोलॉजी ट्रांसफर भी किया जाएगा, जिससे भारत के मेक इन इंडिया इनिशिएटिव को बढ़ावा मिलेगा। यह प्रोजेक्ट 75 का अगला चरण है और इसमें जर्मनी की कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग से भारत में पनडुब्बियों का निर्माण शामिल है। इसी की तर्ज पर प्रोजेक्ट 75 के तहत फ्रांस के सहयोग से 6 स्कॉर्पीन-श्रेणी की पनडुब्बियां बन रही हैं, जिनमें से कुछ नौसेना में शामिल हो चुकी हैं(
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